अगर रोज़ेदार ने मग़रिब के वक़्त किसी जगह रोज़ा इफ़्तार कर लिया हो और फिर वो किसी ऐसी जगह सफ़र कर जाए जहाँ अभी मग़रिब का वक़्त न हुआ हो तो उसके रोज़े का क्या हुक्म है?

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कभी कभी मस्जिद में हमारे हाथ से छूटकर सज्दागाह टूट जाती है या सफाई सुथराई या दूसरे कामों के दौरान नुक़सान पहुंच जाता है तो क्या ऐसी स्थिति में हम इस नुक़सान के ज़िम्मेदार हैं?

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