जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

    ऐसे इंसान के यहाँ खाने में कोई हरज नहीं है. अपने माल से ख़ुम्स न देने वाले के यहाँ खाना खाने में उस वक़्त तक कोई हरज नहीं है जब तक खाई जानी वाली चीज़ पर ख़ुम्स के वाजिब होने का यक़ीन न हो.

    हवाला : फ़िक़्ही मसाएल का मजमूआ, बहस ख़ुम्स, मसला, 1419
    आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई

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