जवाब ( 1 )

  1. नमाज़े एहतियात में दूसरा सूरह और क़ुनूत नहीं होता. इसकी नीयत भी ज़बान से अदा नहीं करना चाहिए और एहतियाते वाजिब यह है कि सूरह ए हम्द और उसके लिए “बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम” भी आहिस्ता से कहना चाहिए.

    हवाला : आयतुल्लाह ख़ामेनई, तौज़ीहुल मसाएल फ़ारसी, मसला 370

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