जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

    इस काम से अगर नमाज़ की शक्ल और हालत में कोई बदलाव नहीं आता तो कोई हरज नहीं है.
    अलबत्ता कुछ मुज्तहेदीन ने हरकत के दौरान कोई भी ज़िक्र पढ़ने से मना किया है.
    हवाला :
    आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली हुसैनी सीस्तानी की वेबसाइट
    http://www.sistani.org

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