जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

    शरीयत के मुताबिक़ कुँवारी लड़की के लिए उसका वाली उसके वालिद या दादा होते हैं. अगर यह दोनों ज़िंदा न हों तो फिर शादी के मसले में यह लड़की खुद मुख्तार है और अपना फैसला खुद ले सकती है.
    हाँ अगर इस लड़की की माँ या बड़ा भाई मौजूद है तो अख़लाक़ायर तहज़ीब का तक़ाज़ा यह है कि उनके मर्ज़ी के अनुसार अमल करे.

    हवाला: आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली हुसैनी सीस्तानी की वेबसाइट
    http://www.sistani.org

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