इन्सान आज़ाद है या मजबूर, वज़ाहत और मिसाल के ज़रिये बताइए?

Question

जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

    इस बारे में तीन दृष्टिकोण पाए जाते हैं:

    1.अशाएरह: इन्सान मजबूर है, जो करता है अल्लाह ही करता है, इन्सान के वश में कुछ भी नहीं. इल्मे कलाम में अशाएरह के इस नज़रिए को “जब्र” कहा जाता है.

    2.मोतज़ेला: इन्सान बिलकुल आज़ाद है, जो करता है वह इंसान ही करता है, तभी तो अपने अच्छे कर्मों के आधार पर वह सवाब और बुरे कामों के आधार पर अज़ाब का हक़दार होता है वरना अगर हर काम अल्लाह ही करे तो सवाब व अज़ाब का न केवल कोई मतलब नहीं बल्कि सरासर ज़ुल्म होगा. करे कोई भुगते कोई और. इल्मे कलाम में मोतज़ेला के इस नज़रिये को “तफ़वीज़” कहा जाता है.

    3.इमामिया: इमाम अ. फ़रमाते हैं: لا جبر و لا تفویض بل امر بین الامرین इन्सान न बिलकुल मजबूर है न ही बिलकुल आज़ाद बल्कि “अम्र बैनल अमरैन” यानी इन दोनों के बीच में है. (बिहारुल अनवार,जि.4,पे.197)

    इस “अम्र बैनल अमरैन” को सादा अंदाज़ में यूं समझाया जा सकता है कि आप खड़े हो जाइए, अब एक पैर उठा लीजिये, ज़ाहिर सी बात है कि आप यह काम करने में सक्षम हैं कि जब चाहें एक पैर उठा लें और जब चाहें रख लें लेकिन अगर आपसे कहा जाये कि दोनों पैर एक साथ उठा लें तो यह काम अपने बस में नहीं है.

    हालाँकि यह मिसाल “अम्र बैनल अमरैन” के एक पहलू को समझा रही है जबकि इसके और भी पहलू हैं जिसको समझाने के लिए “सिलसिलेवार कारण” और “समानांतर कारण” के अंतर को समझाना होगा, इसी तरह “उपक्रमात्मक कारण” और “सम्पूर्ण कारण” और इसी के साथ साथ “आत्मनिर्भर कारण ” और “निर्भर कारण” को समझना होगा… इसके बाद हम “अम्र बैनल अमरैन” की वज़ाहत यूं पेश कर सकते हैं कि अल्लाह के अलावा सब “उपक्रमात्मक कारण” हैं और सबकी कारण शक्ति सिलसिलेवार और निर्भर है और इस सिलसिलेवार कारण के क्रम में सर्वप्रथम कारण एक अकेला अल्लाह है जिसका कोई शरीक नहीं है, वही सम्पूर्ण कारण है, वही अस्ली कारण है, और वह अपनी कारण क्षमता में आत्मनिर्भर है, किसी दूसरे का बिलकुल मोहताज नहीं है जबकि हम अपनी कारण क्षमता में किसी हद तक हमें भी इख़्तियार है फिर भी हम अपनी कारण क्षमता में आत्मनिर्भर नहीं हैं.

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