नादानी में बिना ग़ुस्ले जेनाबत रखे गए रोज़ों का क्या हुक्म है?

Question

जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

    अगर उसे पता था कि वह जेनाबत की हालत में है लेकिन यह नहीं जानता था कि ऐसी हालत में ग़ुस्ल वाजिब होता है तो ऐसी सूरत में उन रोजों की क़ज़ा करना वाजिब है जो उसने जेनाबत की हालत में रखे.

    http://www.leader.ir/fa/book/

    हालाँकि आयतुल्लाह सीस्तानी फ़रमाते हैं कि अगर उसने मसाएल सीखने में कोताही नहीं की है तो रोजों की क़ज़ा नहीं है, हाँ लेकिन नमाज़ की क़ज़ा करना होगी.

    http://www.islamquest.net/fa/archive/question/3687

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