जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

    इस सिलसिले में रहबरे मोअज्ज़म आयतुल्लाह ख़ामेनई और आयतुल्लाहिल उज़मा सीस्तानी के फतवों के हिसाब से ख़ुलासे के तौर पर यूँ कहा जा सकता है कि:

    मिलावट दो तरह से हो सकती है:

    1.इस्तेहाला (पूरी तरह से घुलकर किसी दूसरी ऐसी चीज़ में बदल जाना जोकि पाक होती है) हो चुका है और मिलावट हुई है

    2.मिलावट हुई है लेकिन इस्तेहाला (dissolution) नहीं हुआ है

    पहली वाली सूरत में तो पाक है और उसका प्रयोग करना भी जाएज़ है लेकिन दूसरी कंडीशन में फिर दो कंडीशन हैं:

    1.उस दवा के अलावा किसी दूसरी दवा का इस्तेमाल मुमकिन है

    2.इलाज सिर्फ़ उसी दवा के इस्तेमाल पर निर्भर है

    पहली वाली कंडीशन में ज़रूरी है कि उस दवा से परहेज़ किया जाये और दूसरी दवाओं और दूसरे इलाज के तरीक़े के सहारा लिया जाये लेकिन अगर इलाज सिर्फ़ उसी दवा पर निर्भर है और बीमारी भी बर्दाश्त के बाहर है तो ज़रुरत भर ऐसी दवा के इस्तेमाल करने में कोई हर्ज नहीं है

    हवाले:

    मराजे’अ के आफ़िस से फ़तवा लिया गया: आयतुल्लाह ख़ामेनई, मकारिम शीराज़ी, नूरी हमदानी (मुद्दा ज़िल्लोहुमुल आली) बज़रिये इस्लामक्वेस्ट वेबसाइट سایت اسلام کوئست.

    राज्यों की वेबसाइट, रहबरे मोअज्ज़म के नुमाइंदे, नुमाइंदगी सेक्शन के सवालात, इस्तेफ़्ता (फ़तवा लेना) का न. 502993

    मुन्तख़बुल मसाएल, पे. 102, सवाल न. 403, 405 और 406

    आयतुल्लाह सीस्तानी के इस्तेफ़्ताआत, नुमाइंदों से मख़सूस, क़ुम आफ़िस, पे. 57, 61 और 62

    किलीशे वेबसाइट (आयतुल्लाह सीस्तानी से मख़सूस वेबसाइट), उनके नुमाइंदों के लिए ख़ास, “इस्तेफ़्ताआते नजफ़” के सेक्शन में, सवाल न. 45044 से फ़ायदा लेते हुए और इसी तरह “क्लीशे” सेक्शन से

    Tebyan.net

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