जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

    इस तरह की क़ब्रों पर पैर रखने के सिलसिले में आयतुल्लाह ख़ामेनई का नज़रिया यह है कि बज़ाते ख़ुद कोई हर्ज नहीं है. (आयतुल्लाह ख़ामेनई के दफ़्तर से इस्तेफ़्ता न. l3euOb3YLeY)

    क्योंकि वह नाम उस साहेबे क़ब्र का है, इमामों का नहीं. जिस तरह सद्दाम हुसैन में “हुसैन” लफ़्ज़ का कोई तक़द्दुस (पवित्रता) नहीं है. हालाँकि अगर किसी जगह या किसी माहौल में यह काम इमामों की तौहीन का सबब बने तो पैर रखना मुनासिब नहीं है और ज़ाहेरन इसी वजह से आयतुल्लाह सीस्तानी की नज़र में इस तरह की क़ब्रों पर पैर रखना जाएज़ नहीं है.

    (आयतुल्लाह सीस्तानी के दफ़्तर से इस्तेफ़्ता न. 779923)

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