जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
    यह दो रकअत है. हर रकअत में पांच रुकूअ और दो सज्दे हैं. शरीयत में इसके वाजिब होने के असबाब यह हैं.
    सूरज ग्रहण, चाँद ग्रहण चाहे थोड़ा सा ही क्यों न हो. इसी तरह ज़लज़ला और हर वह ग़ैर मामूली काम जिस से अक्सर लोग ख़ौफ़ज़दा हो जाएं. जैसे सुर्ख आंधी, सियाह या पीली आंधियां जो ग़ैर मामूली हों या बेहद अँधेरा या ज़मीन का धंसना, पहाड़ का टूट कर गिरना, बिजली की कड़क और वह आग जो आसमान में दिखाई देती है.
    सूरज ग्रहण, चाँद ग्रहण और ज़लज़ले के अलावा बाक़ी सब चीज़ों में आम लोगों का ख़ौफ़ज़दा होना शर्त है. लिहाज़ा अगर इन में से कोई चीज़ खौफनाक न हो या उस से बहुत काम लोग ख़ौफ़ज़दा हों तो नमाज़े आयात वाजिब नहीं है.

    हवाला : https://www.leader.ir/ur/book/106/

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