जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

    अगर मरने वाले ने अपने माल के तीसरे हिस्से के बारे में कोई वसिय्यत नहीं की है और उन पर कोई माली वाजिब भी नहीं है जैसे हज,ख़ुम्स,क़र्ज़,क़ज़ा नमाज़ व रोज़े वगैरह तो ऐसी सूरत में कुल पूँजी वारिसों को ट्रांसफ़र हो जाएगी लिहाज़ा अगर सारे वारिसान राज़ी हों तो मीरास में से जितना और जिस मद में चाहें ख़र्च कर सकते हैं लेकिन अगर मरने वाले पर कोई माली वाजिब है तो पहले अस्ल माल में से उसको अदा करना वाजिब है. ख़ुदा बेहतर जानता है.

    http://www.imam-khomeini

    https://www.sistani.org

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