जवाब ( 1 )

  1. बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

    अम्र बिल मारूफ और नही अज़ मुनकर दीने इस्लाम के अहम् वाजिबात में से हैं, यह बेहद अहम् फ़रीज़ा है. जो लोग इस अज़ीम दीनी फ़रीज़े को छोड़ दें या इस से ग़ाफ़िल और ला ताल्लुक़ रहें वह गुनहगार हैं और उन्हें सख़्त सज़ा और अज़ाब का सामना करना होगा.
    अम्र बिल मारूफ और नही अज़ मुनकर पर सभी फुक़्हा और मुज्तहेदीन एकमत ही नहीं बल्कि इसका वाजिब होना दीने इस्लाम की बुनियादी ज़रूरत में शुमार होता है.

    हवाला : तालीमे अहकाम, अध्याय 8, बहस – अम्र बिल मारूफ और नही अज़ मुनकर, पेज 429
    आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई

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