अगर जान बूझ कर नमाज़ की तरतीब बदल दी जाए तो क्या हुक्म है?

जवाब




बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

नमाज़ के वाजिबात जिस तरतीब से बयान हुए हैं नमज़ि को उन्हें उसी तरतीब से अंजाम देना चाहिए और हर जुज़ को उसी के मक़ाम पर बजा लाना चाहिए लिहाज़ा अगर जान बूझ कर इस तरतीब को बदल दिया जाए मसलन सूरह को हम्द से पहले पढ़े यह रुकुअ से पहले सज्दे में चला जाए तो नमाज़ बातिल होगी.
 

हवाला : आयतुल्लाह ख़ामेनई, तौज़ीहुल मसाएल फ़ारसी, मसला 297

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