नमाज़े आयात पढ़ने का तरीक़ा क्या है?

नमाज़े आयात पढ़ने का तरीक़ा क्या है? 

जवाब

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम 

नमाज़े आयात पढ़ने के कई तरीक़े हैं: 

1. नमाज़े आयात की दो रकअतें हैं और हर रकअत में पाँच रुकूअ हैं। इस के पढ़ने का तरीक़ा यह है कि नियत करने के बाद इंसान तकबीर कहे और एक दफ़ा अलहम्द और एक पूरा सूरह पढ़े और रुकूअ में जाए और फिर रुकूअ से सर उठाए फिर दोबारा एक दफ़ा अलहम्द और एक सूरह पढ़े और फिर रुकूअ में जाए। इस अमल को पांच दफ़ा अंजाम दे और पांचवें रुकूअ से क़्याम की हालत में आने के बाद दो सज्दे बजा लाए और फिर उठ खड़ा हो और पहली रकअत की तरह दूसरी रकअत बजा लाए और तशह्हुद और सलाम पढ़ कर नमाज़ तमाम करे।

2. नमाज़े आयात में यह भी मुम्किन है कि इंसान नियत करने और तकबीर और अलहम्द पढ़ने के बाद एक सूरह की आयतों के पांच हिस्से करे और एक आयत या उस से कुछ ज़्यादा पढ़े और बल्कि एक आयत से कम भी पढ़ सकता है लेकिन एहतियात की बिना पर ज़रुरी है कि मुकम्मल जुमला हो और उस के बाद रुकूअ में जाए और फिर खड़ा हो जाए और अलहम्द पढ़े बग़ैर उसी सूरह का दूसरा हिस्सा पढ़े और रुकूअ में जाए और इसी तरह इस अमल को दोहराता रहे यहां तक कि पांचवें रुकूअ से पहले सूरे को ख़त्म कर दे मसलन सूरए फ़लक़ में पहले बिसमिल्ला हिर्रहमानिर्रहीम। क़ुल अऊज़ू बिरब्बिलफ़लक़। पढ़े और रुकूअ में जाए उस के बाद खड़ा हो और पढ़े मिन शर्रे मा ख़लक़। और दोबारा रुकूअ में जाए और रुकूअ के बाद खड़ा हो और पढ़े। व मिन शर्रे ग़ासेक़िन इज़ा वक़ब। फिर रुकूअ में जाए और फिर खड़ा हो और पढ़े व मिन शर्रिन्नफ़्फ़ासाति फ़िल उक़द और रुकूअ में चला जाए और फर खड़ा हो जाए और पढ़े व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद। और उस के बाद पांचवें रुकूअ में जाए और (रुकूअ से) खड़ा होने के बाद दो सज्दे करे और दूसरी रकअत भी पहली रकअत की तरह बजा लाए और उस के दूसरे सज्दे के बाद तशह्हुद और सलाम पढ़े। और यह भी जाएज़ है कि सूरे को पांच से कम हिस्सों में तक़सीम करे लेकिन जिस वक़्त भी सूरह ख़त्म करे लाज़िम है कि बाद वाले रुकूअ से पहले अलहम्द पढ़े।

http://alhassanain.org/hindi/?com=content&id=1525

तौज़ीहुल मसाएल उर्दू, आयतुल्लाह सीस्तानी, मस'अला न. 1486 से 1488 तक 

3. ऊपर बयान किये गए दो तरीक़ों में से पहली रक्अत को पहले तरीक़े से और दूसरी रक्अत को दूसरे तरीक़े से पढ़े.

4. वह सूरह जिसकी एक आयत पहले रुकू से पहले क़ेयाम में पढ़ी थी, उसे दूसरे, तीसरे या चौथे रुकू से पहले वाले क़ेयाम में ख़त्म कर दे इस सूरत में वाजिब है कि रुकू से सर उठाने के बाद क़ेयाम में सूरह अलहम्द और एक दूसरा सूरह या उसकी एक आयत पढ़े, अगर तीसरे या चौथे रुकू से पहले हो तो उस सूरत में वाजिब है कि पांचवें रुकू से पहले दूसरा सूरह मुकम्मल कर दे.

इस्तेफ़्ता'आत आयतुल्लाह ख़ामेनईसवाल न. 712 

नोट: आयतुल्लाह ख़ामेनई के मुताबिक़ अकेले बिस्मिल्लाह को एक आयत शुमार करना सही नहीं है और आयतुल्लाह सीस्तानी इस मस’अले में एहतियाते वाजिब लगाते हैं.  




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