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क्या शरई मसलों का सीखना ज़रूरी है?

जवाब

जी हां मुकल्लफ़ के लिए रोज़ाना पेश आने वाले मसअलों का सीखना ज़रूरी है यानि जिनके सीखे बिना रोज़ाना के शरई अहकाम को अंजाम न दिया जा सके जैसे नमाज़, रोज़े, तहारत (पवित्रता) और कुछ लेनदेन के मसअले। अगर अहकाम न सीखने की वजह से उससे वाजिब छूट जाए या कोई हराम काम अंजाम पा जाए तो वह गुनहगार है। 

  • मुकल्लफ़ उस इंसान को कहते हैं जिसमें इस्लामी अहकाम के वाजिब होने की शर्तें पाई जाती हों।
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Mohd asad18 January 2021 02:59 am
Ji ha zaruri taki haq aur na hak ho Jan sakey taki haram kamo aur haram Riza sey duri rahay
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