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क्या लफ़्ज़े शिया क़ुरान में इस्तेमाल हुआ है?

अगर शिया हक़ पर हैं तो क्या लफ़्ज़े शिया क़ुरान में इस्तेमाल हुआ है?

जवाब

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम 

पहली बात तो यह है कि शिया असली इस्लाम से हटकर अलग कोई फ़िर्क़ा नहीं, शीइयत वही असली इस्लाम है, इस्लाम बरहक़ है तो शीइयत भी बरहक़ है. 

दूसरी बात यह कि जो लोग शीइयत के हक़ पर होने को मानने के लिए क़ुरान में लफ़्ज़े शिया तलाश कर रहे हैं क्या किसी और फ़िर्क़े का नाम क़ुरान में दिखा सकते हैं?! हरगिज़ नहीं 

अस्ल में किसी मकतबे फ़िक्र की हक़्क़ानियत उसकी दलीलों में होती है, नाम में नहीं, फिर भी जानकारी के लिए अर्ज़ है कि लफ़्ज़े शिया क़ुरान में कई बार ज़िक्र हुआ है जो या गिरोह के माना में है या फिर पैरोकार के माना में है जैसे: 

1.शिया यानी गिरोह:

ثُمَّ لَنَنْزِعَنَّ مِنْ كُلِّ شِيعَةٍ أَيُّهُمْ أَشَدُّ عَلَى الرَّحْمَنِ عِتِيًّا

(سوره ۱۹: مريم - پارہ ۱۶۔ آیت ۶۹)

2.शिया यानी पैरोकार:

आज लफ़्ज़े शिया इसी माना में इस्तेमाल होता है, क़ुरान में कई जगह यह लफ़्ज़ पैरोकार के माना में इस्तेमाल हुआ है जैसे:

وَدَخَلَ الْمَدِينَةَ عَلَى حِينِ غَفْلَةٍ مِنْ أَهْلِهَا فَوَجَدَ فِيهَا رَجُلَيْنِ يَقْتَتِلَانِ هَذَا مِنْ شِيعَتِهِ وَهَذَا مِنْ عَدُوِّهِ فَاسْتَغَاثَهُ الَّذِي مِنْ شِيعَتِهِ عَلَى الَّذِي مِنْ عَدُوِّهِ فَوَكَزَهُ مُوسَى فَقَضَى عَلَيْهِ قَالَ هَذَا مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ إِنَّهُ عَدُوٌّ مُضِلٌّ مُبِينٌ

سوره ۲۸: القصص – پارہ ۲۰ ۔ آیت ۱۵))

इस आयत में हज़रत मूसा के पैरोकार को शिया कहा गया है और साथ में فَاسْتَغَاثَهُ الَّذِي مِنْ شِيعَتِهِ  से पता चलता है कि जो जिसका पैरोकार हो वो उस से मदद के लिए फ़रयाद भी कर सकता है.

3.हज़रत इब्राहीम, शिया 

وَإِنَّ مِنْ شِيعَتِهِ لَإِبْرَاهِيمَ

                                                                                                 (سوره ۳۷: الصافات – پارہ ۲۳ –آیت ۸۳)

क़ुरान में और भी जगहें हैं जहाँ लफ़्ज़े शिया इस्तेमाल हुआ है लेकिन उन जगहों को बयान करना इस लिए ज़रूरी नहीं कि सिर्फ़ क़ुरान में नाम आ जाना हक़ पर होने की कोई दलील नहीं है क्योंकि क़ुरान में तो फ़िरऔन का भी नाम आया है...बहरहाल बयान की गयी बातें भी सिर्फ़ जानकारी के लिए अर्ज़ कर दीं,  जिससे पता चल जाये कि जो यह कहता है कि क़ुरान में लफ़्ज़े शिया का कोई वुजूद ही नहीं है वो शख़्स क़ुरान से कितना ना वाक़िफ़ और ग़ाफिल है?!

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