क्या इत्र (ख़ुश्बू) लगाने से रोज़ा बातिल या मकरूह हो जाता है ?



जवाब

सलामन अलैकुम  
सभी मराजे इकराम: रोज़े में इत्र लगाना मकरूह नहीं है, बल्कि सिर्फ़ खुशबूदार पौधों को सूंघना मकरूह है।
तौज़ीहुल मसाएल मराजे, जिल्द 01 , पेज 961 , मसअला 1657  हवाला

आयतुल्लाह सिस्तानी ने भी पौधों का सूंघना मकरूहात में शुमार करने के बाद फ़रमाया है कि इत्र का इस्तेमाल मकरूह  नहीं है।
तौज़ीहुल मसाएल जामे, मसअला 2032 मकरूह नंबर 05 हवाला

और रहबरे मोअज़्ज़म आयतुल्लाह ख़ामेनेई का कहना है कि इत्र का इस्तेमाल मुस्तहब है चाहे इंसान रोज़े से हो या रोज़े से न हो।  हवाला

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